प्राइवेट स्कूलों की मनमानी कब तक चलेगी?

• किताबें, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी सिर्फ स्कूल से ही खरीदनी पड़ती है, बाहर से सस्ती मिलने पर भी मना करते हैं।

• हर थोड़े-थोड़े दिन में कोई न कोई एक्टिविटी या इवेंट निकालकर अलग से पैसे माँग लेते हैं।

• बिना किसी ठोस वजह के फीस बढ़ा दी जाती है और माता-पिता को मजबूरन मानना पड़ता है।

• जुलाई-अगस्त में एडमिशन लेने वाले बच्चे से भी अप्रैल से फीस वसूल ली जाती है, जबकि न बच्चा स्कूल गया, न कोई क्लास हुई।

• नर्सरी, LKG, UKG जैसे छोटे बच्चों को इतना होमवर्क दिया जाता है कि टीचर क्लास में एक बार पढ़ाती या लिखवाती है, बाकी सब घर पर 20-20 बार करवाना पड़ता है। फिर भी बच्चे को याद नहीं रहता। फीस स्कूल को दो, प्रैक्टिस घर पर करवाओ… ये कैसे सही है? प्रैक्टिस स्कूल में भी होनी चाहिए, होमवर्क का इतना बोझ नहीं डालना चाहिए।

ये सिर्फ बच्चों की पढ़ाई नहीं, माता-पिता की जेब और समय की भी लूट है।

आजमगढ़ के प्राइवेट स्कूलों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

क्या आप भी इससे सहमत हैं?

#Azamgarh #PrivateSchool #EducationSystem #UP